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मानवाधिकार संगठनों ने गरीबों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चर्चा की
Publish Date :
08/04/2014

गरीबों और हाशिये पर मौजूद लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दे पर राष्ट्रीय राजधानी में कई मानवाधिकार संगठनों ने एकजुट होकर एक जन सुनवाई की।

पेंशन परिषद, भोजन का अधिकार अभियान, मनरेगा के लिए राष्ट्रीय मजदूर अधिकार मोर्चा, जन स्वास्थ्य अभियान और नेशनल अलायंस फॉर पीपुल्स मूवमेंट के प्रतिनिधियों ने उद्योगों के पक्ष में किए गए श्रम कानूनों में बदलाव पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने भू उपयोग में परिवर्तन, भूमि के जबरन अधिग्रहण पर भी ध्यान केंद्रित किया।

इनका लोगों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पडता है। उनके लिए सामाजिक और आर्थिक रूप से और जोखिम पैदा हो जाता है। पेंशन परिषद के प्रतिनिधियों ने मौजूदा पेंशन योजना में विसंगतियों को रेखांकित किया और मांग की कि शिकायत निवारण के लिए तंत्र बनाया जाए तथा पेंशन की राशि में महंगाई बढने के अनुसार इजाफा किया जाए।

पेंशन परिषद के कार्यकर्ता निखिल डे ने कहा, ‘‘शिकायत निवारण के लिए कोई तंत्र नहीं है। पेंशन सार्वभौम होना चाहिए। पेंशन कम से कम 2000 रूपये प्रति महीना या सेवानिवृति के वक्त के न्यूनतम वेतन की आधा होनी चाहिए।

पेंशन राशि महंगाई के साथ संबद्ध की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्यादातर राज्य त्रैमासिक आधार पर पेंशन मुहैया करते हैं। पेंशन प्रत्येक महीने की पहली तारीख को मिलनी चाहिए।

हम अनुरोध करते हैं कि 55 साल से अधिक उम्र के सभी नागरिकों को पेंशन मिलना चाहिए। इसके अलावा वृद्धावस्था पेंशन के साथ साथ स्वास्थ्य सुविधा और राशन जैसी सामाजिक सुरक्षा भी मुहैया की जानी चाहिए।

भोजन का अधिकार अभियान ने सरकार से आनुवांशिक संवर्द्धित :जीएम: फसलों को खुले बाजार में जारी करने पर सरकार से रोक लगाने का अनुरोध किया।

 
 
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