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जानिए, आखिर क्या है यह पीपीपी मॉडल, कैसे होता है लागू?
Publish Date :
07/17/2014

संसाधनों की किल्लत से जूझ रहा रेलवे अब ढांचागत परियोजनाओं से लेकर यात्री सुविधाओं को पीपीपी माडल से पूरा करने पर जोर देगा। इसके लिए रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने रेल बजट में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर कई परियोजनाओं की घोषणा की है। रेलवे में पीपीपी नया नहीं है।

मढौरा मधेपुरा रेल कारखाने जैसी पीपीपी परियोजनाएं पहले से चल रही हैं। लेकिन दिक्कतों के कारण ज्यादा निवेश नहीं आया। सरकार अब पीपीपी मॉडल पर फोकस करते हुए विभिन्न परियोजनाओं के लिए इसे इस्तेमाल करेगी।

क्या है ये पीपीपी

पीपीपी परियोजना का अर्थ है किसी भी परियोजना के लिए सरकार या उसकी किसी वैधानिक संस्था और निजी क्षेत्र के बीच हुआ लंबी अवधि का समझौता। इस समझौते के तहत शुल्क लेकर ढांचागत सेवा प्रदान की जाती है। इसमें आमतौर पर दोनों पक्ष मिलकर एक स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) गठित करते हैं, जो परियोजना पर अमल का काम करता है। दोनों पक्षों के बीच जिस समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, उसे मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट कहा जाता है।

रेलवे के मामले में पीपीपी परियोजनाओं के लिए निजी कंपनियों के साथ समझौता रेलवे या उसकी कंपनियां हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन, रेल विकास निगम, रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, रेलटेल, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरपोरेशन, इरकान और राइट्स आदि करेंगी।

क्या है प्रक्रिया

किसी भी परियोजना को सार्वजनिक निजी भागीदारी के जरिये पूरा करने के लिए रेलवे को पीपीपी आधार पर परियोजना शुरू करने से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद परियोजना में निजी भागीदारी के लिए निविदाएं आमंत्रित होंगी। निविदाएं खुलने के बाद विजेता कंसोर्टियम अथवा कंपनी के साथ सरकारी पक्ष कंसेशन एग्रीमेंट करेगा। दोनों पक्षों के बीच संयुक्त उद्यम समझौता होगा, जो परियोजना को कार्यान्वित करेगा। पीपीपी मॉडल के तहत संयुक्त उद्यम एक निश्चित अवधि के बाद वापस सरकार के हवाले कर दिया जाता है।

 
 
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