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पस्त कांग्रेस पर भारी पड़ी भाजपा
Publish Date :
03/20/2014

 विधानसभा चुनाव में करारी हार के दो महीने बाद भी कांग्रेस राजस्थान में भ्रमित और पस्त पड़ी है। कांग्रेस अगर राजनैतिक भ्रम के भंवरजाल से बाहर नहीं निकली तो राजस्थान के लोकसभा चुनाव में भी विधान सभा जैसा नतीजा सामने होगा। पार्टी न तो विधान सभा चुनाव में पार्टी का कोई चेहरा मजबूती से सामने ला पाई थी और न अब ला पा रही है।बीते सोमवार को राजस्थान में राहुल गांधी की सभा में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलौत को नेताओं की दूसरी कतार में बैठा कर अपनी अदूरदर्शिता का परिचय दे दिया था जिसे बाद में राहुल गांधी ने सुधारा। ऐसी ही गलतियों के चलते पार्टी का पिछड़ा जनाधार पिछले चुनाव में खिसक गया था और विधान सभा चुनाव के मतदान के समय दोपहर बाद कांग्रेस के कार्यकर्त्ता मतदान केन्द्रों से जा चुके थे और भाजपा के प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं ने इस मौके का फायदा उठाते हुए इसे मोदी की लहर में बदल दिया। कांग्रेस फिर उसी रास्ते पर है और भाजपा परंपरागत तौर तरीकों से लेकर अत्याधुनिक औजारों से चुनाव लड़ रही है। विधान सभा चुनाव में भी कांग्रेस आलाकमान की वजह से ही पार्टी उस राजस्थान में हारी जहां उसकी सरकार ने हाशिए के समाज के लिए महत्वपूर्ण काम किया। ‘ पिछले एक साल में जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल  में पच्चीस लाख से ज्यादा लोगों ने इलाज कराया जो देश के किसी भी बड़े से बड़े अस्प्ताल में आने वाले लोगों की संख्या से ज्यादा रही है। वजह इस अस्पताल में मरीजों को न सिर्फ दवा मुफ्त मिलती है बल्कि सारे मेडिकल परीक्षण का भी कोई पैसा नहीं लगता है।’यह टिप्पणी राजस्थान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव तारा सिंह सिद्धू की थी जिनकी पार्टी विधान सभा चुनाव में कांग्रेस भाजपा के खिलाफ एक लोकतांत्रिक मोर्चा बना कर चुनाव लड़ी थी। वे प्रदेश भाजपा के पक्ष में पड़े वोटों से हैरान थे और इसके पीछे चुनावी खेल की आशंका भी जता रहे थे। सिद्धू का यह भी कहना था कि बीते चुनाव में घरों तक पर्चियां पहुँचाने का पूरा नेटवर्क संघ के पास पहुँच चुका था और इसका फायदा भाजपा ने ठीक से उठाया।राजस्थान में कांग्रेस के क्षत्रपों ने भी अपने फायदे के लिए पार्टी की बेड़ा गर्क कर दिया है। विधान सभा चुनाव में सभी प्रमुख क्षत्रपों ने अपनी लोकसभा सीट को ताकत देने के लिए जनाधारविहीन समर्थकों को विधान सभा का टिकट दिलवा कर अशोक गहलौत की हार चुनाव से पहले सुनिश्चित कर दी थी।चुनाव से पहले पार्टी ने भावी सरकार का चेहरा कौन होगा इस पर भी ऐसा भ्रम फैलाया कि जो पिछड़ी जातियां गहलौत के साथ थी वह भी पाला बदल गई क्योकि अब उनका वह उत्साह नहीं रहा जो पहले था। जबकि वसुंधरा राजे सिंधिया भाजपा के मुख्यमंत्री पद का अकेला चेहरा थी। भाजपा ने यह चुनाव जिस कुशलता और रणनीति से लड़ा वह बेमिसाल था। खुद वसुंधरा ने मैदान में उतर कर मोर्चा सम्भाला और मोदी की एक के बाद एक सभाएं कराकर माहौल बदल दिया। प्रचार में मोदी का कोई विकल्प का कांग्रेस के पास नहीं था। राहुल थे पर वे पांच छह मिनट के भाषण में वह प्रभाव नहीं छोड़ पाते जो मोदी पचास मिनट तक अनवरत गुजरात की मार्केटिंग कर बनाते थे। मोदी सही बोलते थे या गलत यह अलग मुद्दा हैं पर उनका भाषण का असर पड़ा जो नतीजों में भी सामने आ गया। फिर संघ के प्रचार तंत्र ने गहलौत की उपलब्धियों को उनकी नाकामी में बदल दिया। सरकार ने जो दवा मुफ्त दी उसे विरोधियों ने एक्सपायरी डेट की दवा बताकर माहौल बना दिया। इस प्रचार का मुकाबला कांग्रेस के रणनीतिकार नहीं कर पाए और आज भी यह जारी है। भाजपा की प्रवक्ता ज्योति किरण ने इस संवाददाता से कहा- गहलौत सरकार ने मरीजों को मुफ्त दवा के नाम पर तीन सौं करोड़ की दवाएं खरीदी जो रखे-रखे खराब हो गईं। इससे तो नुकसान हुआ। अब हम इस योजना को दुरुस्त कर रहे हैं।हालांकि राजनैतिक विश्लेषक राजीव जैन इस प्रचार को चुनावी मानते हैं। जैन ने कहा-चुनाव के समय राजनैतिक फायदे के लिए कोई भी कुछ भी बोल देता है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने कहा-भाजपा और संघ के झूठे प्रचार से लोग भ्रमित हुए। हम जो दवा दे रहे थे उसे इन लोगों ने ज़हर बता दिया। अब इस प्रचार का मुकाबला करने में हम नाकाम रहे। विकास को जो काम हमने किए उस पर ध्यान ही नहीं दिया गया और दुष्प्रचार से चुनाव लड़ा गया।

जनादेश एलेक्टलाइन  कि  साझापहल 
 
 
 
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