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नजर मुलायम की होली पर !
Publish Date :
03/20/2014

 इटावा । सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के गांव सैफई मे हर साल होने वाले होली समारोह मे चुनाव आयोग की निगाह रहेगी ऐसी खबरे सरकारी स्तर पर चुनाव आयोग की ओर से आ रही है। साल 2009 मे संसदीय चुनाव के दौरान भी मुलायम की होली पर चुनाव आयोग की छाया पड चुकी है लेकिन उस समय चुनाव आयोग ने सपा प्रमुख को इसलिए से नोटिस भी जारी किया था क्यो कि मुलायम सिंह यादव मैनपुरी संसदीय सीट से सपा प्रत्याशी थे और उनके सामने ही वहा पर फाग गायको को पैसे बांटे जा रहे थे आयोग के नोटिस मिलने के बाद इसे आचार संहिता के दायरे मे नही माना गया था लेकिन इस बार आये आयोग के निर्देशो के तहत मुलायम की होली पर आयोग की निगाह रहेगी। 

इटावा के जिलानिर्वाचन अधिकारी विद्या भूषण ने आज मुख्यालय परिसर मे आयोजित चुनाव आयोग की आचार सहिंता नियमावली की बैठक करते हुए साफ साफ निर्देशित किया कि होली को चुनाव प्रचार का उत्सव कतई न बनायें। होली पर राजनैतिक दृष्टि से किसी भी प्रकार का उपहार वितरण आदि कार्य आचार संहिता का उल्लंघन होगा। नैतिकता से होली को सामाजिक पर्व के रूप में मनाये। चुनाव की दृष्टि से ऐसा कोई कृत्य न किया जाये जिसमें आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हो। जिला मजिस्ट्रेट ने इस बात का भी संकेत दिया कि फ्लांइग स्काट द्वारा चुनाव की दृष्टि से इन्फोर्समेंट कार्य किया जायेगा।
सैफई की होली का एक अलग ही चार्म रहता है क्यो कि यहा पर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव अपने परिवार के साथ लंबे समय से अपने घर पर होली खेलने के लिए आते है। अपने गांव वालो और अपनो के बीच होली के रंग खेलने का आंनद कुछ अलग ही नजर आता है क्यो कि होली का रंग के बीच कोई भी खास नही होता है। 
वैसे तो सैफई की होली काफी लोकप्रिय पहले से ही थी लेकिन साल 2009 मे सैफई मे फाग के दौरान फाग गायको को पैसे बांटे जाने के बाद मुलायम के गांव के होली एकाएक और अधिक सुर्खियो मे आ गई। उस समय संसदीय चुनाव की आचार सहिंता लागू थी और मुलायम का गांव मैनपुरी संसदीय क्षेत्र मे आता है इसलिए चुनाव आयोग ने मुलायम की होली मे पैसे बांटे जाने के मामले को लेकर आयोग ने नोटिस जारी कर दिया । 
मथुरा की लठठमार होली की तुलना मे मुलायम सिंह यादव के गांव सैफई की कपडा फाड होली का आनंद भी किसी मायने मे कम नही आंका जा सकता है लेकिन अब कपडा फाड होली की नही दिखती है कोई तस्वीर। सिर्फ यादो मे सिमट करके रह गई है सैफई की कपडा फाड होली। 
सैफई फाग समिति के अध्यक्ष और फाग गायक दशरथ सिंह यादव बताते है कि सैफई मे कपडा फाड होली का क्रेज आज के करीब 10 साल पहले तक काफी हुआ करता था करीब 10 साल पहले लोगो के कपडे फटने की वजह से खुद नेताजी ने ही कपडा फाडने पर रोक लगवा दी है तब से लगातार रोक लगी हुई है। लेकिन वे यह बता पाने कि स्थिति मे नही है कि यह कपडा फाड पंरपरा की शुरूआत कब हुई और किसने की। 
दशरथ का कहना है कि नेता जी के घर पर बना हुआ तालाब ही होली के उत्साह का सबसे बडा गवाह है क्यो कि 1989 मे मुख्मंत्री बनने से पहले ही इसी तालाब मे खुद नेता जी गांव के बुर्जगो का डुबो करके होली की शुरूआत करते थे अब वो दौर सब बदल गया है कई बार कई अहम राजनेताओ के कपडे होली के उत्साह मे फट गये उसके बाद इसको बदला गया। 
देश के हर छोटे बडे राजनेता अपने पंरपरागत रंगो के त्यौहार होली को बडे ही जोश खरोश के साथ मनाते आ रहे है इन्ही राजनेताओ मे से एक है समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव। मुलायम सिंह यादव की एक खासियत है कि वो होली से लेकर दूसरे पंरपरागत त्यौहारो को अपने गांव सैफई मे अपने परिवार और गांव वालो के बीच ही आकर ही मनाते है। 
मुलायम सिंह यादव की होली का अंदाज कुछ निराला ही है। सैफई मे मुलायम सिंह यादव के घर के भीतर लान मे होली का जश्न सुबह से ही हर साल मनाया जाता रहा है जहा गाव के लोग होली के जश्न मे फाग के जरिये शामिल होते है। वही पार्टी के छोटे बडे राजनेता भी होली के आंनद मे सराबोर होने के लिये दूर दराज से आते रहते है। रंगो से दूरी बना चुके मुलायम सिंह यादव अब गुलाल और फूलो से होली खेल करके आंनद लेते है। इसलिये होली के एक दिन पहले ही कानपुर और आगरा जैसे बडे महानगरो से खासी तादात मे फूलो को मंगवा लिया जाता है फूलो की तादात उन हालात मे दोगनी और चौगुना हो जाती है जब पार्टी के कई नेता भी खासी तादात मे अपने नेता को खुश करने के लिये फूल लेकर पहुचते है। 
होली की उमंग का ब्रज में अलग ही अंदाज होता है। लट्ठमार होली, रसिया गीत और रंग के साथ फूलों की होली ब्रज में सर्वत्र दिखायी देती है। ढोलक मजीरा, हारमोनियम, चीमटा और खड़ताल की ध्वनि के मध्य किया फाग गाया जाता है। फाग विशेष तौर से इटावा, मैनपुरी, एटा, फीरोजाबाद, आगरा, मथुरा आदि जनपदों में होता है। सपा सुप्रीमो व्यस्तता के बाद भी फाग गायन के शौक को भूले नहीं और प्रतिवर्ष इसका होली और सैफई महोत्सव में इसका आनंद उठाते हैं।
इटावा में अब से 20-25 वर्ष पहले यादव बाहुल्य गांवों में फाग जमकर होती थी। बूढ़े-बड़ों और युवाओं में इसके प्रति न केवल लगाव था, बल्कि होली आने से पहले खेतों पर काम करते, हल चलाते और बुवाई-कटाई करते समय फाग गाने की प्रैक्टिस करते थे, मगर अब इसका शौक कम ही है। अन्य लोकगीतों की तरह फाग गायन विधा भी विलुप्तता की ओर बढ़ने लगी। देश की राजनीति मे खास मुकाम कायम कर चुके मुलायम सिंह यादव अपनी युवा अवस्था से ही फाग गायन के शौकीन रहे। उनके गांव सैफई में फाग की जो टोलियां उठती थीं, उनमें वह शरीक होते थे। इसलिए राजनीति में ऊंचाई हासिल करने के बावजूद उन्होंने फाग गायन से मुंह नहीं मोड़ा बल्कि इस गायकी को प्रमुखता देने का बीड़ा उठाया।
अपने हमसंगी सैफई गांव के प्रधान दर्शन सिंह यादव के साथ मुलायम सिंह यादव फाग गाते थे। आज भी वह हर वर्ष होली पर होने वाली फाग में न केवल शरीक होते हैं वरन घंटों फाग गायन सुनते और गाते हैं। फाग को भुला न दिया जाये इसके लिए हर वर्ष सैफई महोत्सव में उनके निर्देश पर दो दिन तक फाग गायन का मुकाबला होता है। 
सैफई फाग समिति के अध्यक्ष और फाग गायक दशरथ सिंह यादव बताते हैं कि फाग विशुद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक गायन है, जिसमें गीता, महाभारत, कृष्ण जीवन तथा रामायण से जुड़े प्रसंगों के भजनों का गायन होता है। यदि कहीं दो टोलियां फाग की होती है तो एक टोली जो भजन की लाइन गाती है, उसका जवाब दूसरी टोली देती है। फाग गायक सज्जन सिंह ने बताया कि होली दहन के समय होलिका प्रहलाद के भजन के साथ होली के भजन होते हैं, जिनमें वाद यंत्रों और हूंकारों की गूंज से मस्ती बिखरती है।
जनादेश एलेक्टलाइन  कि  साझापहल 
 
 
 
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