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कट्टरपंथियों-सरकार में मध्यस्थता करने वाले ने कहा इंदिरा के करीबी नहीं चाहते थे सुलह
Publish Date :
02/07/2014

जालंधर. ब्लूस्टार ऑपरेशन से पहले केंद्र और जरनैल सिंह भिंडरावाला के बीच मध्यस्थता करने वाले वरिष्ठ पत्रकार भरपूर सिंह बलबीर का कहना है कि इंदिरा गांधी के कुछ करीबी कांग्रेसी नेता नहीं चाहते थे कि सिखों के साथ मामला शांत हो। वे नहीं चाहते थे कि सिखों की मांग मानीं जाएं क्योंकि इससे अकाली राजनीति पंजाब में मजबूत हो जाती।

पंजाब में उस समय कांग्रेस को मुख्य चुनौती अकालियों से ही थी। 1975 में कांग्रेस सरकार की लगाई गई इमरजेंसी के दौरान अकाली दल ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बड़े स्तर पर विरोध किया था। हजारों लोगों की गिरफ्तारियां हुईं थीं। जब उनसे पूछा गया कि ये करीबी नेता कौन थे तो बलबीर ने कहा- पुराने कांग्रेसी सब जानते हैं। उनका नाम लेकर मैं माहौल नहीं बिगाडऩा चाहता।

भास्कर ने 5 फरवरी को ही दमदमी टकसाल के मुखिया रहे भिंडरावाला को इंदिरा गांधी के लिखे दुर्लभ पत्र का खुलासा किया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जितनी भी बातचीत भिंडरावाला और अकाली लीडरशीप से हुई थी वह बलबीर के जरिए ही हुई थी।
बातचीत की पहल इंदिरा गांधी ने ही की थी

83 वर्षीय बलबीर ने अपनी याद्दाश्त पर जोर डालते हुए बताया कि इंदिरा ने ही पहल करते हुए उनसे भिंडरावाला और अकाली लीडरशीप से बात करने को कहा था। पर उनके आस-पास कुछ ऐसे लोग थे जो कभी नही चाहते थे कि सिखों और केंद्र में मामला नरम हो। उन्होंने बताया कि इंदिरा से उनके अच्छे संबंध थे और वे ये सब होता देख रहे थे। उन्होंने कहा कि मैंने मध्यस्थ की भूमिका इसीलिए निभाई ताकि इस लॉबी को रोका जा सके।  उन्होंने माना कि अकाली दल के लीडरों संत हरचंद सिंह लौंगोवाल, गुरचरण सिंह टोहड़ा, जगदेव सिंह तलवंडी, प्रकाश सिंह बादल और संत जरनैल सिंह भिंडरावाला के वैचारिक मतभेद जरूर थे, लेकिन सिखों की कई मांगों पर वे सब एकमत भी थे।

जब उनसे यह पूछा गया कि आखिरकार यह वार्ता किस मुकाम पर टूटी तो उन्होंने बताया कि बातचीत जारी थी। फिर ब्लू स्टार ऑपरेशन हो गया। इससे ज्यादा कुछ भी कहने से उन्होंने इनकार कर दिया। गौरतलब है कि पिछले दिनों ऑपरेशन ब्लूस्टार पर खुलासा हुआ था कि इंदिरा ने इस ऑपरेशन के लिए ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मागे्र्रट थैचर से मदद मांगी थी।
नेताजी के नाम से मशहूर हैं बलबीर

नेता जी के नाम से मशहूर पत्रकार भरपूर सिंह बलबीर ने फौज की नौकरी करने के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के साहित्य गुरमत प्रकाश में बतौर चीफ एडिटर काम शुरू किया। उसके बाद वे पंजाबी अखबार अकाली पत्रिका के चीफ एडिटर बने। इसके बाद  'अज दी आवाज़' पंजाबी अख़बार में भी एडिटर रहे। पिछले समय ब्रेन स्ट्रोक की वजह से वे काफी बीमार चल रहे हैं।
मतलब और भी है

खत का मतलब यह भी हो सकता है कि इंदिरा शांति चाहती हों। ब्लूस्टार ने सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई। पर अकाली सिर्फ  वोट की राजनीति के लिए ही ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं।
सुखपाल सिंह खैरा, प्रवक्ता, पंजाब कांग्रेस
 

 
 
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